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ग्रामसभा शाहपुर का ऐतिहासिक फैसला — SECL के कोल ब्लॉक को किया खारिज,प्रस्ताव पारित।

ग्रामसभा शाहपुर का ऐतिहासिक फैसला — SECL के कोल ब्लॉक को किया खारिज,प्रस्ताव पारित।

धरमजयगढ़=ग्राम पंचायत शाहपुर के ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि हमारे जंगल-जल-जमीन पर हमारा अधिकार’ — पाँचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत ग्रामसभा का ऐलान ग्राम पंचायत शाहपुर में आज 23 नवंबर 2025 को आयोजित ग्रामसभा ने पाँचवीं अनुसूची (1996) एवं छत्तीसगढ़ पेसा अधिनियम 2022 के संवैधानिक अधिकारों का पालन करते हुए प्रस्तावित एसईसीएल ओपन कोल ब्लॉक (कुल रकबा 1677.253 हेक्टेयर) को सर्वसम्मति से पूर्णतः व स्थायी रूप से निरस्त कर दिया। ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि ग्राम की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का खनन, उद्योग, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, सर्वे या जनसुनवाई पूरी तरह अवैध मानी जाएगी।ग्रामसभा का बड़ा निर्णय — पाँचवीं अनुसूची और पेसा कानून का हवाला ग्रामसभा ने पेसा अधिनियम 2022 की प्रमुख धाराओं—धारा 4(क), 4(घ), 4(च), 4(ज) — के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए कहा कि भूमि, जल, वन और प्राकृतिक संसाधनों पर अंतिम निर्णय ग्रामसभा का है। जनजातीय क्षेत्रों में संसाधनों के उपयोग के लिए ग्रामसभा की सहमति सर्वोपरि है।

छोटे बड़े झाड़ के 622.253 हेक्टेयर जंगल,हाथी गलियारा और खतरे में जंगल।

ग्रामसभा ने बताया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र घने जंगल और पारंपरिक हाथी गलियारे का मुख्य हिस्सा है। पास बहने वाली मांड नदी हाथियों और वन्यजीवों का जीवन आधार है। खनन होने पर मानव-हाथी संघर्ष, जनहानि और पर्यावरणीय विनाश निश्चित है। इस आधार पर ग्रामसभा ने कोल ब्लॉक को पूर्ण रूप से अस्वीकार किया।

ग्रामीणों ने कहा कोल ब्लॉक से प्रसिद्ध मां अंबेटिकरा मंदिर मिट जाने का खतरा

खनन क्षेत्र के बिल्कुल पास स्थित इस प्राचीन धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। खनन से होने वाला धूल-प्रदूषण मंदिर के अस्तित्व को ही समाप्त कर देगा। ग्रामसभा ने धार्मिक स्थल की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए प्रोजेक्ट को सख्ती से खारिज किया।

ग्राम सभा के प्रस्ताव में लिखा SECL कोयला खदान से आदिवासी पुरखा देव-स्थलों के विनाश हो जाएगा।

कोल ब्लॉक के दायरे में आदिवासी समुदाय के पुरखा देव, दुल्हा देव, बूढ़ी माता, डिही-डीहरिन, पाठ देवता, खंभेसरी, सारंगढ़ी सहित कई परंपरागत देवस्थल हैं। ग्रामवासियों ने कहा—हम किसी भी कीमत पर अपनी सांस्कृतिक विरासत नहीं मिटने देंगे”,
और कोल ब्लॉक को अस्वीकार किया।
SECL के कोल ब्लॉक से हजारों किसानों की खेती और आय पर खतरा

ग्राम पंचायत क्षेत्र के हजारों किसान तरबूज, मक्का, धान की खेती से प्रति किसान लगभग 10 लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित करते हैं। ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि खनन से जलस्रोत दूषित होंगे, खेती बर्बाद होगी और किसानों की आजीविका समाप्त हो जाएगी।ऐसा विकास हमें मंजूर नहीं जो हमारी जमीन और रोजगार छीन ले।”

ग्राम सभा एस.डी.एम.को भू-अर्जन दर्ज हटाने का निर्देश

ग्रामसभा ने आरोप लगाया कि पटवारी द्वारा कई किसानों की जमीन पर बिना सहमति के भू-अर्जन दर्ज किया गया है। प्रस्ताव में अनुविभागीय अधिकारी को तत्काल यह प्रविष्टि हटाने का निर्देश देने की मांग की गई, ताकि किसान शासकीय योजनाओं से वंचित न हों।

पर्यावरणीय जनसुनवाई पूरी तरह से ग्रामीणों ने किया खारिज

ग्रामसभा ने 1677.253 हेक्टेयर के कोल ब्लॉक के लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार की पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित न करने की मांग की और कहा कि ग्रामसभा की असहमति के बावजूद जनसुनवाई कराने का कोई भी प्रयास अवैध और गैरकानूनी होगा।

ग्रामसभा की अंतिम घोषणा

ग्रामसभा शाहपुर ने एक स्वर में कहा
हमारे क्षेत्र में कोयला खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। किसी भी तरह का खनन, सर्वे, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन या जनसुनवाई अस्वीकार्य और अवैध है।ग्रामसभा के इस ऐतिहासिक निर्णय को ग्रामीणों ने अपने अस्तित्व, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की लड़ाई का हिस्सा बताया।

Dhirendra Mishra

धिरेन्द्र मिश्रा एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो ज़मीनी मुद्दों से लेकर सामाजिक विकास, प्रशासनिक गतिविधियों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर गहन रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय पत्रकारिता करते हुए उन्होंने हमेशा निष्पक्ष, सटीक और जनता की आवाज़ को प्राथमिकता दी है।

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