ग्रामसभा शाहपुर का ऐतिहासिक फैसला — SECL के कोल ब्लॉक को किया खारिज
धरमजयगढ़—-ग्राम पंचायत शाहपुर के ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि हमारे जंगल-जल-जमीन पर हमारा अधिकार’ — पाँचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत ग्रामसभा का ऐलान ग्राम पंचायत शाहपुर में आज 23 नवंबर 2025 को आयोजित ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से SECL कोल ब्लॉक को पूर्णतः व स्थायी रूप से निरस्त कर दिया। ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि ग्राम की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का खनन, उद्योग, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, सर्वे या जनसुनवाई पूरी तरह अवैध मानी जाएगी।
ग्रामसभा का बड़ा निर्णय —
पाँचवीं अनुसूची और पेसा कानून का हवाला से ग्रामसभा ने पेसा अधिनियम 2022 की प्रमुख धाराओ के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए कहा कि भूमि, जल, वन और प्राकृतिक संसाधनों पर अंतिम निर्णय ग्रामसभा का है। जनजातीय क्षेत्रों में संसाधनों के उपयोग के लिए ग्रामसभा की सहमति सर्वोपरि है।
ग्रामसभा ने बताया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र घने जंगल और पारंपरिक हाथी गलियारे का मुख्य हिस्सा है। पास बहने वाली मांड नदी हाथियों और वन्यजीवों का जीवन आधार है। खनन होने पर नदी और पर्यावरणीय विनाश निश्चित है। इस आधार पर ग्रामसभा ने कोल ब्लॉक को पूर्ण रूप से अस्वीकार किया।
ग्रामीणों ने कहा कोल ब्लॉक से प्रसिद्ध मां अंबेटिकरा मंदिर मिट जाने का खतरा
ग्राम सभा के प्रस्ताव में लिखा SECL कोयला खदान से आदिवासी पुरखा देव-स्थलों के विनाश हो जाएगा।
कोल ब्लॉक के दायरे में आदिवासी समुदाय के पुरखा देव, दुल्हा देव, बूढ़ी माता, डिही-डीहरिन, पाठ देवता, खंभेसरी, सारंगढ़ी सहित कई परंपरागत देवस्थल हैं। ग्रामवासियों ने कहा—हम किसी भी कीमत पर अपनी सांस्कृतिक विरासत नहीं मिटने देंगे और कोल ब्लॉक को अस्वीकार किया।
SECL के कोल ब्लॉक से हजारों किसानों की खेती और आय पर खतरा
ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि खनन से जलस्रोत दूषित होंगे, खेती बर्बाद होगी और किसानों की आजीविका समाप्त हो जाएगी।ऐसा विकास हमें मंजूर नहीं जो हमारी जमीन और रोजगार छीन ले।1
पर्यावरणीय जनसुनवाई पूरी तरह से ग्रामीणों ने किया खारिज
ग्रामसभा ने 1677.253 हेक्टेयर के कोल ब्लॉक के लिए सरकार द्वारा किसी प्रकार की पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित न करने की मांग की और कहा कि ग्रामसभा की असहमति के बावजूद जनसुनवाई कराने का कोई भी प्रयास अवैध और गैरकानूनी होगा।
ग्रामसभा की अंतिम घोषणा
ग्रामसभा शाहपुर ने एक स्वर में कहा
हमारे क्षेत्र में कोयला खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। किसी भी तरह का खनन, सर्वे, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन या जनसुनवाई अस्वीकार्य और अवैध है।ग्रामसभा के इस ऐतिहासिक निर्णय को ग्रामीणों ने अपने अस्तित्व, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की लड़ाई का हिस्सा बताया।